स्रोत और पद्धति
हर प्रतीक पेज दो नज़रियों को जोड़ता है। पारंपरिक हिस्सा बताता है कि क्लासिक स्वप्न ग्रंथ आमतौर पर क्या कहते हैं। मनोवैज्ञानिक हिस्सा उस प्रचलित आधुनिक सोच को दर्शाता है कि सपने भावनाओं, यादों और रोज़मर्रा की चिंताओं का प्रतिबिंब हैं।
हम इन रचनाओं को शब्दशः उद्धृत नहीं करते और इनके लेखकों के नाम पर कोई ख़ास वाक्य नहीं जोड़ते। इन्हें यहाँ उन मुख्य परंपराओं के रूप में बताया गया है जिनसे अर्थ लिए गए हैं।
मुख्य रचनाएँ और परंपराएँ
- Oneirocritica — Artemidorus of Daldis (2nd century CE)
- Ta‘bir al-Ru’ya — Ibn Sirin (attributed) (8th century tradition)
- Ta‘tir al-Anam fi Ta‘bir al-Manam — ‘Abd al-Ghani al-Nabulsi (1684)
- Die Traumdeutung (The Interpretation of Dreams) — Sigmund Freud (1899)
- Man and His Symbols — Carl Gustav Jung (1964)
- The Meaning of Dreams — Calvin S. Hall (1953)
सपनों के अर्थ सांस्कृतिक परंपराओं और आधुनिक मनोविज्ञान के विचारों को दर्शाते हैं। ये भविष्यवाणी नहीं हैं और चिकित्सा या मनोवैज्ञानिक सलाह का विकल्प नहीं हैं।